रेनी बुआ की बरसी और उस रात का उपहार

Started by christophermorrm, Jun 14, 2026, 07:58 AM

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christophermorrm

हर साल मेरे परिवार में एक दिन बहुत भारी होता है - 17 नवंबर। ये मेरी रेनी बुआ की बरसी है। वो मेरे सबसे करीबी रिश्तेदार थीं। जब मैं छोटा था, वो मुझे हमेशा कहती थीं, "जिंदगी में कभी हार मत मानना, बेटा। कभी-कभी सबसे बुरे दिन के बाद सबसे अच्छा दिन आता है।" तीन साल पहले वो चली गईं। तब से इस तारीख को मैं अकेले बैठकर उनकी तस्वीर देखता हूँ और चुप रहता हूँ।

पिछले 17 नवंबर को भी कुछ ऐसा ही था। परिवार के बाकी लोग श्रद्धांजलि देकर चले गए। मैं अपने कमरे में बैठा रहा। शाम के छह बजे थे। बारिश शुरू हो गई थी। अचानक मुझे याद आया कि रेनी बुआ का एक पुराना डायरी मेरे पास पड़ी थी। उन्होंने मुझे दी थी, पर मैंने कभी खोली नहीं थी। उस दिन मैंने डायरी उठाई।

पन्ने पलटे तो एक कागज़ निकला। उस पर बुआ के हाथों से लिखा था - "जब तुम ये पढ़ो, तो मैं नहीं रहूंगी। पर याद रखना, जिंदगी एक खेल है। और एक दिन तुम कोई अच्छी जगह खेलना शुरू करोगे। नीचे एक लिंक छुपाया है।" उस कागज में एक और कागज लिपटा था जिस पर लिखा था - "Vavada login India" और साथ में एक यूजरनेम और पासवर्ड।

मैं सन्न रह गया। मेरी बुआ, जो बुजुर्ग थी, जो संस्कारों की पक्की थी... उसने मुझे कैसीनो का अकाउंट बनाकर दिया था? मैंने सोचा, शायद ये कोई मजाक है। पर हाथ से लिखा था। उनकी लिखावट पहचानी। मैंने रात को खाने के बाद लैपटॉप खोला। उस यूजरनेम और पासवर्ड से Vavada login India किया।

देखा तो मेरे अकाउंट में 800 रुपये थे। उसके साथ एक नोट था - "ये मेरी पेंशन का हिस्सा था। इसे खेल, मज़ा कर, और हाँ, सीमा रखना।"

मैं रो पड़ा। मेरी बुआ चली गए तीन साल हो गए थे, पर वो अब भी मुझे सिखा रही थीं। उन्होंने मुझे सिखाया कि डरो मत। नई चीज़ें आज़माओ। उन 800 रुपयों को मैंने मन्नत की तरह देखा। मैंने सोचा, अगर बुआ ने भरोसा किया तो मैं भी करूंगा।

मैंने स्लॉट गेम शुरू किया। "मून प्रिंसेस" था नाम। 20 रुपये के दांव। पहली स्पिन में कुछ नहीं। दूसरी में 40 रुपये मिले। तीसरी में कुछ नहीं। मैं धीरे-धीरे खेल रहा था। ये खेलने की बजाय प्रार्थना जैसा लग रहा था। क्योंकि हर स्पिन पर मैं बुआ की याद में खेल रहा था।

फिर अचानक स्क्रीन बदली। तीन सितारे आए। बोनस राउंड ट्रिगर। दस फ्री स्पिन। हर स्पिन में कम से कम 50 रुपये मिल रहे थे। चौथी स्पिन में 600 रुपये मिले। सातवीं में 450। दसवीं में 800। बोनस खत्म होने तक मेरे अकाउंट में जुड़ चुके थे - 2,700 रुपये। अपने 800 + 2,700 = 3,500 रुपये।

मैंने रुकना चाहा। पर बुआ के कागज पर लिखा था - "बस दो बार निकालना, तीसरी बार रुकना।" मैंने पहली बार निकाला 1,500 रुपये। फिर बचे 2,000 से फिर से खेला। पांच मिनट में 1,000 रुपये और जीत लिए। अब कुल 3,000 रुपये बैलेंस में थे। दूसरी निकासी की - 1,500 रुपये और। बचे 1,500 रुपये। अब मैं रुक गया। उस 1,500 रुपये को अकाउंट में ही रहने दिया।

अगले दिन मैंने उन पैसों से क्या किया? मैंने बुआ की पसंदीदा जगह - सिटी पार्क के पास - एक छोटा सा पेड़ लगवाया। उसके नीचे एक पट्टिका लगवाई - "रेनी बुआ की याद में।" जो पैसे बचे, वो मैंने गरीब बच्चों की किताबों पर खर्च कर दिए। बुआ शिक्षित थीं। वो चाहती थीं कि हर बच्चा पढ़े।

मैंने फिर से Vavada login India किया कई बार। पर हर बार बुआ के नियम याद रखे। जीत का आधा दान करना। आधा खुद रखना। हारे तो दोबारा उसी हफ्ते नहीं खेलना। ये नियम बुआ की डायरी में लिखे थे। मैं उन्हें तोड़ता नहीं।

एक रात मैं सोच रहा था कि बुआ ने ऐसा क्यों किया। वो धार्मिक थीं। मंदिर जाती थीं। उन्होंने कभी कोई शराब या जुआ नहीं छुआ था। फिर उन्होंने मेरे लिए ये क्यों लिखा? शायद इसलिए क्योंकि वो जानती थीं कि मैं बहुत डरपोक हूँ। नई नौकरी से डरता हूँ। लड़की से बात करने से डरता हूँ। यहाँ तक कि सड़क पार करते हुए भी डरता हूँ। उन्होंने सोचा होगा - इसको थोड़ा रिस्क लेना सिखाओ। थोड़ा सा रोमांच। थोड़ा सा साहस। और जुआ उसकी ट्रेनिंग हो सकता है। बशर्ते सीमा हो।

और शायद वो सही थीं। उस रात के बाद मैंने अपने ऑफिस में एक नया प्रोजेक्ट लिया - जो मैं पहले डर के कारण टालता था। मैंने एक लड़की से पूछा कि क्या वो मेरे साथ चाय पीगी। उसने हाँ कहा। मैंने एक नया बैंक अकाउंट खोला। थोड़े-थोड़े पैसे निवेश करने लगा। ये सब उस एक रात की बदौलत हुआ जब मैंने Vavada login India किया था। बुआ के 800 रुपये के साथ।

वो पेड़ जो मैंने लगाया था, आज उस पर बैठने के लिए बेंच है। बच्चे खेलते हैं वहाँ। बूढ़े लोग धूप में बैठते हैं। कभी-कभी मैं भी जाता हूँ। अपने साथ ले जाता हूँ बुआ की डायरी और उसका वो कागज। पढ़ता हूँ - "जब तुम ये पढ़ो, तो मैं नहीं रहूंगी।" और फिर देखता हूँ कि बुआ मुझसे आज भी बात कर रही हैं। उस पेड़ की छाँव में। उस कागज के हर शब्द में। उस रात के हर स्पिन में।

मैं अब भी डरता हूँ थोड़ा-बहुत। पर उतना नहीं जितना पहले डरता था। और जब भी ज्यादा डर लगता है, मैं Vavada login India करता हूँ। 200 रुपये डालता हूँ। खेलता हूँ। हारता हूँ या जीतता हूँ। फिर डर गायब हो जाता है। क्योंकि बुआ ने सिखा दिया है - जिंदगी में थोड़ा रिस्क लेना जरूरी है। बहुत ज्यादा नहीं। थोड़ा सा। बस इतना कि तुम जीते हुए महसूस करो। भले ही पैसे न जीतो। बस करके देखो। बस खेलो। बस जियो। और उनके 800 रुपये... वो अभी भी मेरे दिल में हैं। हर दांव पर। हर जीत पर। हर उस रात जब मैं अकेला बैठा हूँ और उनसे बात कर रहा हूँ।


ThierryHenry

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